अथर्ववेद (कांड 4)
त्वं हि वि॑श्वतोमुख वि॒श्वतः॑ परि॒भूर॑सि । अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम् ॥ (६)
हे अग्नि! तुम सभी ओर मुख वाले एवं सर्वव्यापक हो. तुम हमारे पाप नष्ट करो. (६)
O agni! You are all-faced and omnipresent. You destroy our sins. (6)
कांड 4 → सूक्त 33 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation