अथर्ववेद (कांड 4)
घृ॒तह्र॑दा॒ मधु॑कूलाः॒ सुरो॑दकाः क्षी॒रेण॑ पू॒र्णा उ॑द॒केन॑ द॒ध्ना । ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त्पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः ॥ (६)
हे यजमान! स्वर्गलोक में घी से भरे हुए गड्ढों वाली, शहद के किनारों वाली, मदिरा रूपी जल वाली तथा दूध, दही एवं जल से पूर्ण सभी धाराएं तेरे समीप पहुंचें. ब्रह्मौदन सत्र यज्ञ के फल के रूप में प्राप्त स्वर्ग में मधुरता पूर्ण सिंचन करती हुई ये सभी धाराएं तेरे समीप पहुंचें तथा समीप में वर्तमान सरोवर भी उपस्थित हों. (६)
O host! In heaven, all the streams of pits filled with ghee, honey edges, wine-like water and full of milk, curd and water should reach you. All these streams should reach you while sanctifying sweetly in heaven obtained as the fruit of Brahmaudan Session Yajna and the present lake should also be present nearby. (6)