हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.36.3

कांड 4 → सूक्त 36 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
य आ॑ग॒रे मृ॒गय॑न्ते प्रतिक्रो॒शेऽमा॑वा॒स्ये॑ । क्र॒व्यादो॑ अ॒न्यान्दिप्स॑तः॒ सर्वां॒स्तान्त्सह॑सा सहे ॥ (३)
युद्ध भूमि में जो पिशाच हमें खाने के लिए खोजते हैं तथा शत्रुओं द्वारा किए गए आक्रोश के कारण अमावस्या की आधी रात में हमें मारना चाहते हैं, हम मंत्रों के प्रभाव से उन्हें पराजित करते हैं. (३)
In the battlefield, the vampires who search for us to eat and want to kill us in the middle of the new moon night due to the anger caused by the enemies, we defeat them with the effect of mantras. (3)