हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.36.5

कांड 4 → सूक्त 36 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
ये दे॒वास्तेन॒ हास॑न्ते॒ सूर्ये॑ण मिमते ज॒वम् । न॒दीषु॒ पर्व॑तेषु॒ ये सं तैः प॒शुभि॑र्विदे ॥ (५)
हे अग्नि आदि देवो! जो पशु, राक्षस, पिशाच आदि से बचना चाहते हैं तथा उन्हें छोड़ कर सूर्य के समान वेग से भागते हैं तथा जो पशु नदियों और तीर्थो में घूमते हैं, तुम्हारे प्रभाव से मैं उन राक्षस आदि को मार कर उन पशुओं के साथ संयुक्त होता हूं. (५)
O God of agni! Those who want to avoid animals, demons, vampires, etc. and leave them and run at the same speed as the sun and the animals that roam in rivers and pilgrimages, under your influence, I kill those demons etc. and join those animals. (5)