हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.37.7

कांड 4 → सूक्त 37 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 37
आ॒नृत्य॑तः शिख॒ण्डिनो॑ गन्ध॒र्वस्या॑प्सराप॒तेः । भि॒नद्मि॑ मु॒ष्कावपि॑ यामि॒ शेपः॑ ॥ (७)
मैं मोर के समान नाचते हुए अप्सरा के पति गंधर्व के अंडकोषों को फोड़ता हूं तथा उस के पुरुष जननांग को निष्क्रिय बनाता हूं. (७)
I dance like a peacock and break the testicles of Gandharva, the husband of the nymph, and make his male genitalia inactive. (7)