हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.37.6

कांड 4 → सूक्त 37 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 37
एयम॑ग॒न्नोष॑धीनां वी॒रुधां॑ वी॒र्या॑वती । अ॑जशृ॒ङ्ग्य॑राट॒की ती॑क्ष्णशृ॒ङ्गी व्यृ॑षतु ॥ (६)
जड़ीबूटियों एवं वृक्षों में सब से अधिक शक्ति वाली अजशृंगी, अराटकी तथा तीक्ष्ण शृंगी नाम की जड़ीबूटियां आ गई हैं. इस स्थान से राक्षस भाग जाएं. (६)
Herbs and trees have come with the most power called Ajshringi, Arataki and Sharp Shringi. Escape the demons from this place. (6)