हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.39.6

कांड 4 → सूक्त 39 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 39
द्यौर्धे॒नुस्तस्या॑ आदि॒त्यो व॒त्सः । सा म॑ आदि॒त्येन॑ व॒त्सेनेष॒मूर्जं॒ कामं॑ दुहाम् । आयुः॑ प्रथ॒मं प्र॒जां पोषं॑ र॒यिं स्वाहा॑ ॥ (६)
द्यौ गाय है और सूर्य उस का बड़ा है. वह द्यौ रूपी गाय सूर्य रूपी बछड़े के कारण मेरे लिए मनचाहा बलकारक अन्न प्रदान करे. वह मुझे सौ वर्ष की आयु, प्रजा, पुष्टि और धन प्रदान करे. यह हवि उत्तम आहुति वाला हो. (६)
It is a cow and the sun is its great. That cow of dyau should provide the strong food i want for me due to the calf of the sun. May He give me a hundred years of age, subjects, confirmation and wealth. This is the best sacrifice. (6)