हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.9.10

कांड 4 → सूक्त 9 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
यदि॒ वासि॑ त्रैककु॒दं यदि॑ यामु॒नमु॒च्यसे॑ । उ॒भे ते॑ भ॒द्रे नाम्नी॒ ताभ्यां॑ नः पाह्याञ्जन ॥ (१०)
हे अंजन! तू मनुष्यों द्वारा चाहे त्रिककुद पर्वत से संबंधित कहा जाता है अथवा यमुना से संबंधित. तेरे त्रैककुद और यामुन दोनों ही नाम कल्याणकारी हैं. तू अपने दोनों नामों के द्वारा हमारी रक्षा कर. (१०)
O Anjan! Whether you are said by humans to belong to The Trikkud Mountain or yamuna. Both your trikkud and yamun names are welfare. Protect us by your two names. (10)