हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.9.8

कांड 4 → सूक्त 9 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
त्रयो॑ दा॒सा आञ्ज॑नस्य त॒क्मा ब॒लास॒ आदहिः॑ । वर्षि॑ष्ठः॒ पर्व॑तानां त्रिक॒कुन्नाम॑ ते पि॒ता ॥ (८)
कठिनता से जीवित रखने वाला ज्वर, सन्निपात और सर्प का विषये तीन दास के समान अंजन मणि के वश में हैं. अर्थात्‌ अंजनमणि इन के विकार को दूर कर देती है. पर्वतो में सब से प्राचीन त्रिककुद तुम्हारा पिता है. (८)
The subjects of fever, sannipat and snake, which survive hard, are under the control of Anjan Mani like three slaves. That is, Anjanmani removes their disorder. The oldest trichiad in the mountains is your father. (8)