हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.10.1

कांड 5 → सूक्त 10 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त् । ए॒तत् स ऋ॑च्छात् ॥ (१)
हे पत्थर के बने घर! तू मेरा है. जो पापी हत्यारा मुझे पूर्व दिशा की ओर से नष्ट करना चाहता है, वह नाश को प्राप्त हो. (१)
O house of stone! You are mine. The sinful murderer who wants to destroy me from the east direction, he attains destruction. (1)