हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.10.4

कांड 5 → सूक्त 10 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॒ मोदी॑च्या॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त् । ए॒तत् स ऋ॑च्छात् ॥ (४)
हे पत्थर के बने घर! तू मेरा है. जो पापी मेरी हत्या करने की इच्छा से उत्तर दिशा से आता है, वह मेरे समीप आ कर नष्ट हो जाए. (४)
O house of stone! You are mine. The sinner who comes from the north direction with the desire to kill me, he should come near me and perish. (4)