हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.10.6

कांड 5 → सूक्त 10 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 10
अ॑श्मव॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मो॒र्ध्वाया॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त् । ए॒तत्स ऋ॑च्छात् ॥ (६)
हे पत्थर के घर! तू मेरा है. जो पापी मुझे ऊपर की दिशा से समाप्त करना चाहता है, उस का नाश हो. (६)
O house of stone! You are mine. The sinner who wants to eliminate me from the upward direction, let him perish. (6)