अथर्ववेद (कांड 5)
उदे॒णीव॑ वार॒ण्य॑भि॒स्कन्धं॑ मृ॒गीव॑ । कृ॒त्या क॒र्तार॑मृच्छतु ॥ (११)
कृत्या इस प्रकार अपने निर्माणकर्ता के पास जाए, जिस प्रकार ऐणी नाम की हिरनी, हथिनी और मृगी शीघ्रता से झपटती है. (११)
The work should go to its creator in this way, just as the deer, elephant and antelope named Aini quickly pounce. (11)