हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.19.15

कांड 5 → सूक्त 19 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 19
न व॒र्षं मै॑त्रावरु॒णं ब्र॑ह्म॒ज्यम॒भि व॑र्षति । नास्मै॒ समि॑तिः कल्पते॒ न मि॒त्रं न॑यते॒ वश॑म् ॥ (१५)
जिस राज्य में ब्राह्मण को दुःख दिया जाता है, उस में वरुण वर्षा नहीं करते. उस राष्ट्र की सभा सामर्थ्य हीन होती है तथा उस की सेना शत्रुओं को वश में नहीं रख पाती है. (१५)
In a state where a Brahmin is hurt, Varuna does not rain. The assembly of that nation is powerless and its army is not able to control the enemies. (15)