अथर्ववेद (कांड 5)
सिं॒ह इ॑वास्तानीद्द्रु॒वयो॒ विब॑द्धोऽभि॒क्रन्द॑न्नृष॒भो वा॑सि॒तामि॑व । वृषा॒ त्वं वध्र॑यस्ते स॒पत्ना॑ ऐ॒न्द्रस्ते॒ शुष्मो॑ अभिमातिषा॒हः ॥ (२)
हे दुदुंभि! तू सिंह के समान गर्जन कर. हे वृक्ष के समान अधिक आयु वाली दुदुंभी! तू गाय को देख कर रंभाने वाले बैल के समान शब्द करती है. विशेष रूप से बंधी हुई तू वीर्य वर्षा करने वाली है, इस कारण तेरे शत्रु शक्ति रहित हो जाते हैं. तेरा बल इंद्र के समान है, इसलिए उसे वीर्य ही सहन कर पाता है. (२)
O milk! Roar like a lion. O bride with a long life like a tree! You look at the cow and say words like a bull that rams. Especially tied, you are going to rain semen, because of this your enemies become powerless. Your strength is like Indra, so only semen can bear it. (2)