हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.22.11

कांड 5 → सूक्त 22 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
मा स्मै॒तान्त्सखी॑न्कुरुथा ब॒लासं॑ का॒समु॑द्यु॒गम् । मा स्मातो॒ऽर्वाङैः पुन॒स्तत्त्वा॑ तक्म॒न्नुप॑ ब्रुवे ॥ (११)
हे ज्वर! तू खांसी और शक्ति क्षीण करने वाले रोगों को हमारा मित्र मत बना. मैं तुझसे बारबार निवेदन करता हूं कि तू उस निचले स्थान से यहां मत आ. (११)
O fever! Do not make cough and power-retarding diseases our friend. I again and again beseech you not to come here from that lower place.