हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.26.12

कांड 5 → सूक्त 26 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 26
अश्वि॑ना॒ ब्रह्म॒णा या॑तम॒र्वाञ्चौ॑ वषट्का॒रेण॑ य॒ज्ञं व॒र्धय॑न्तौ । बृह॑स्पते॒ ब्रह्म॒णा या॑ह्य॒र्वाङ् य॒ज्ञो अ॒यं स्व॑रि॒दं यज॑मानाय॒ स्वाहा॑ ॥ (१२)
हे अश्विनीकुमारो! तुम बृहस्पति देव एवं मंत्रों के साथ इस यज्ञ की वृद्धि करते हुए हमारे सामने आओ. यह यज्ञ यजमान के हेतु कल्याण करने वाला हो. यह आहुति अश्विनीकुमारों एवं बृहस्पति के हेतु उत्तम हो. (१२)
O Ashwinikumaro! You come before us, increasing this yajna with Jupiter Dev and mantras. This yajna should be beneficial for the host. This sacrifice should be good for Ashwini Kumars and Jupiter. (12)