हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.27.10

कांड 5 → सूक्त 27 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
तन्न॑स्तु॒रीप॒मद्भु॑तं पुरु॒क्षु । देव॑ त्वष्टा रा॒यस्पो॑षं॒ वि ष्य॒ नाभि॑मस्य ॥ (१०)
हे त्वष्टा देव! हमारे जल, अन्न और धन की पुष्टि करते हुए तुम इस स्त्री की नाभि खोल दो. (१०)
O God of Tvashta! Confirming our water, food and wealth, open this woman's navel. (10)