अथर्ववेद (कांड 5)
अ॑ग्ने॒ स्वाहा॑ कृणुहि जातवेदः । इन्द्रा॑य य॒ज्ञं विश्वे॑ दे॒वा ह॒विरि॒दं जु॑षन्ताम् ॥ (१२)
हे जन्म लेने वालों के ज्ञाता अग्नि देव! इंद्र के निमित्त इस यज्ञ को संपन्न करो. सभी देव इस हवि को ग्रहण करें. (१२)
O God of agni, the knower of those who are born! Perform this yajna for the sake of Indra. May all gods accept this havi. (12)