अथर्ववेद (कांड 5)
अच्छा॒यमे॑ति॒ शव॑सा घृ॒ता चि॒दीडा॑नो॒ वह्नि॒र्नम॑सा ॥ (४)
घृत एवं हव्य अन्न के सहित स्तुतियों को प्राप्त करने वाले अग्नि देव सामने से आते हैं. (४)
Agni Dev, who receives praises including ghee and havya food, comes from the front. (4)