हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.28.14

कांड 5 → सूक्त 28 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
घृ॒तादुल्लु॑प्तं॒ मधु॑ना॒ सम॑क्तं भूमिदृं॒हमच्यु॑तं पारयि॒ष्णु । भि॒न्दन्त्स॒पत्ना॒नध॑रांश्च कृ॒ण्वदा मा॑ रोह मह॒ते सौभ॑गाय ॥ (१४)
घी से तर तथा शहद से सिंचा हुआ तू पृथ्वी के समान दृढ़ है. तू शत्रुओं को चीरता हुआ एवं उन्हें तिरस्कृत करता हुआ महान सौभाग्य देने के लिए मुझ पर स्थित हो. (१४)
With ghee and honey, you are as strong as the earth. You are seated on me to give great good fortune, tearing off enemies and despising them. (14)