हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.28.3

कांड 5 → सूक्त 28 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
त्रयः॒ पोष॑स्त्रि॒वृति॑ श्रयन्ताम॒नक्तु॑ पू॒षा पय॑सा घृ॒तेन॑ । अन्न॑स्य भू॒मा पुरु॑षस्य भू॒मा भू॒मा प॑शू॒नां त॑ इ॒ह श्र॑यन्ताम् ॥ (३)
तीन पुष्टिकारक इस त्रिवृत्त के आश्रित हों. उषा देवी दूध और घी से इस यज्ञ कर्म को बढ़ाएं. इस के आश्रय में अन्न, पुरुषों और पशुओं की अधिकता रहे. (३)
Three confirmants should depend on this tribron. Usha Devi increase this yajna karma with milk and ghee. There should be a lot of food, men and animals in this shelter. (3)