हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.29.2

कांड 5 → सूक्त 29 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
तथा॒ तद॑ग्ने कृणु जातवेदो॒ विश्वे॑भिर्दे॒वैः स॒ह सं॑विदा॒नः । यो नो॑ दि॒देव॑ यत॒मो ज॒घास॒ यथा॒ सो अ॒स्य प॑रि॒धिष्पता॑ति ॥ (२)
हे जातवेद अग्नि देव! जो हमारे विरुद्ध खेल खेल रहा है तथा जो हमारा भक्षण करना चाहता है, सभी देवों के साथ मिल कर उस का परकोटा गिरा दो. (२)
O Jataveda Agni Dev! Whoever is playing against us and who wants to eat us, together with all the gods, drop his curtain. (2)