अथर्ववेद (कांड 5)
अ॒क्ष्यौ॒ नि वि॑ध्य॒ हृद॑यं॒ नि वि॑ध्य जि॒ह्वां नि तृ॑न्द्धि॒ प्र द॒तो मृ॑णीहि । पि॑शा॒चो अ॒स्य य॑त॒मो ज॒घासाग्ने॑ यविष्ठ॒ प्रति॑ तं शृणीहि ॥ (४)
जो पिशाच हमें खाना चाहता है, तुम उस की आंखें फोड़ दो, जीभ काट डालो और दांत तोड़ दो. इस प्रकार तुम उस का विनाश कर दो. (४)
The vampire who wants to eat us, break his eyes, cut off his tongue and break his teeth. Thus you destroy him. (4)