हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.29.8

कांड 5 → सूक्त 29 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
अ॒पां मा॒ पाने॑ यत॒मो द॒दम्भ॑ क्र॒व्याद्या॑तू॒नां शय॑ने॒ शया॑नम् । तदा॒त्मना॑ प्र॒जया॑ पिशा॒चा वि या॑तयन्तामग॒दो॒यम॑स्तु ॥ (८)
जिस पिशाच ने मुझे जल पीने में, यात्रा करने में तथा सोते समय पीड़ित किया है, हे अग्नि! वह संतान के सहित इसी प्रकार का कष्ट भोगे एवं यह पुरुष रोग रहित हो जाए. (८)
The vampire who has made me suffer in drinking water, traveling and sleeping, O agni! He should suffer the same kind of suffering with the child and this man should become disease-free. (8)