हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.3.4

कांड 5 → सूक्त 3 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
मह्यं॑ यजन्तां॒ मम॒ यानी॒ष्टाकू॑तिः स॒त्या मन॑सो मे अस्तु । एनो॒ मा नि गां॑ कत॒मच्च॑ना॒हं विश्वे॑ दे॒वा अ॒भि र॑क्षन्तु मे॒ह ॥ (४)
मैं जो इच्छा और संकल्प करता हूं, वह सत्य हो. मैं सभी प्रकार के पापों से दूर रहूं तथा विश्वे देव मेरी रक्षा करें. (४)
The desire and resolve I make should be true. May I stay away from all kinds of sins and may Vishwa Dev protect me. (4)