हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.107.3

कांड 6 → सूक्त 107 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 107
विश्व॑जित्कल्या॒ण्यै मा॒ परि॑ देहि । कल्या॑णि द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पा॒द्यच्च॑ नः॒ स्वम् ॥ (३)
हे विश्वजित्‌! मुझे सर्वमंगलकारिणी देवी को दे दो. हे कल्याणी! हमारे सभी दो पैरों वाले पुत्र, पौत्र आदि और चौपायों की रक्षा करो. (३)
O worldly! Give me to Sarvamangalkarini Devi. O Kalyani! Protect all our two-legged sons, grandsons etc. and four-legs. (3)