हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 110
प्र॒त्नो हि कमीड्यो॑ अध्व॒रेषु॑ स॒नाच्च॒ होता॒ नव्य॑श्च॒ सत्सि॑ । स्वां चा॑ग्ने त॒न्वं पि॒प्राय॑स्वा॒स्मभ्यं॑ च॒ सौभ॑ग॒मा य॑जस्व ॥ (१)
सभी देवों की आत्मा होने के कारण ये अग्नि चिरंतन है. ये स्तुति के योग्य एवं यज्ञों में देवों को बुलाने वाले हैं. हे अग्नि! इस प्रकार तुम नवीन बने रहते हो. तुम अपने शरीर को घृत आदि से पूर्ण करो तथा हमारे लिए सौभाग्य प्रदान करो. (१)
Being the soul of all gods, this agni is eternal. They are worthy of praise and are going to call the gods in the yagyas. O agni! In this way, you remain new. May you complete your body with ghee etc. and provide good luck for us. (1)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 110
ज्ये॑ष्ठ॒घ्न्यां जा॒तो वि॒चृतो॑र्य॒मस्य॑ मूल॒बर्ह॑णा॒त्परि॑ पाह्येनम् । अत्ये॑नं नेषद्दुरि॒तानि॒ विश्वा॑ दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय ॥ (२)
ज्येष्ठा नक्षत्र में उत्पन्न पुत्र पिता, बड़े भाई आदि का हंता होता है. मूल नक्षत्र में उत्पन्न पुत्र पूरे कुल की हिंसा करता है. इसलिए इस कुमार के यम द्वारा किए जाने वाले संतान के मूलोच्छेद से रक्षा करो. सौ वर्ष तक जीवित रहने के दीर्घ जीवन के लिए सभी पाप इस कुमार से दूर चले जाएं. (२)
The son born in Jyeshtha Nakshatra is the hanta of father, elder brother etc. The son born in the original nakshatra commits violence of the entire clan. Therefore, protect this Kumar from the meverance of the child done by Yama. For a long life of living for a hundred years, all sins should go away from this Kumar. (2)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 110
व्या॒घ्रेऽह्न्य॑जनिष्ट वी॒रो न॑क्षत्र॒जा जाय॑मानः सु॒वीरः॑ । स मा व॑धीत्पि॒तरं॒ वर्ध॑मानो॒ मा मा॒तरं॒ प्र मि॑नी॒ज्जनि॑त्रीम् ॥ (३)
बाघ के समान क्रूर एवं पाप नक्षत्र में वीर पुत्र ने जन्म लिया. दुष्ट नक्षत्र में उत्पन्न यह पुत्र जन्म लेते ही उत्तम शक्ति वाला बने. यह पुत्र बड़ा हो कर पिता का वध न करे तथा जन्म देने वाली माता की हिंसा न करे. (३)
A brave son was born in the cruel and sin constellation like a tiger. This son born in the evil constellation becomes the best power as soon as he is born. This son should not grow up and kill the father and do not do violence to the mother who gave birth. (3)