हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.128.1

कांड 6 → सूक्त 128 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 128
श॑क॒धूमं॒ नक्ष॑त्राणि॒ यद्राजा॑न॒मकु॑र्वत । भ॑द्रा॒हम॑स्मै॒ प्राय॑च्छन्नि॒दं रा॒ष्ट्रमसा॒दिति॑ ॥ (१)
प्राचीन काल में शकधूम नाम के ब्राह्मण को तारों ने चंद्रमा के समान राजा बनाया. मुझ भद्रा ने इस शकधूम ब्राह्मण को प्राचीन काल में कल्याणकारी समय इसलिए दिया था कि उसे नक्षत्र मंडल का स्वामित्व प्राप्त हो. (१)
In ancient times, a Brahmin named Shakdhum was made a king like the moon by the stars. I, Bhadra, had given this Shakdhum Brahmin a welfare time in ancient times so that he got ownership of nakshatra mandal. (1)