हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.141.3

कांड 6 → सूक्त 141 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 141
यथा॑ च॒क्रुर्दे॑वासु॒रा यथा॑ मनु॒ष्या उ॒त । ए॒वा स॑हस्रपो॒षाय॑ कृणु॒तं लक्ष्मा॑श्विना ॥ (३)
देवों और असुरों ने पशुओं के कानों में शस्त्र से जिस प्रकार का नरमादा होने का चिह्ल बनाया, मनुष्यों ने भी इसी प्रकार चिल्ल बनाया. अश्विनीकुमार गायों की असीमित वृद्धि के लिए इसी प्रकार का चिल्ल बनाएं. (३)
The kind of narmada mark that the gods and asuras made with weapons in the ears of animals, humans also made a chill in the same way. Ashwinikumar make a similar chill for the unlimited growth of cows. (3)