अथर्ववेद (कांड 6)
यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑माद॒धे । ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे ॥ (१)
हे नारी! जिस प्रकार विशाल पृथ्वी प्राणियों के शरीर को धारण करती है, उसी प्रकार तेरा गर्भ भी प्रसव के समय जन्म लेने के लिए स्थित रहे. (१)
O woman! Just as the vast earth holds the body of creatures, so your womb should also be located to be born at the time of delivery. (1)