अथर्ववेद (कांड 6)
पव॑मानः पुनातु मा॒ क्रत्वे॒ दक्षा॑य जी॒वसे॑ । अथो॑ अरि॒ष्टता॑तये ॥ (२)
निचोड़ा जाता हुआ सोम मुझे यज्ञ कर्म के लिए, बल प्राप्ति के लिए, जीवन के लिए तथा अहिंसा करने के लिए पवित्र करे. (२)
May the squeezed Soma sanctify me for yajna karma, for gaining strength, for life and for non-violence. (2)