हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.26.1

कांड 6 → सूक्त 26 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 26
अव॑ मा पाप्मन्त्सृज व॒शी सन्मृ॑डयासि नः । आ मा॑ भ॒द्रस्य॑ लो॒के पाप्म॑न्धे॒ह्यवि॑ह्रुतम् ॥ (१)
हे पाप के अभिमानी देव! मुझे छोड़ दो. तुम सब को वश में करने वाले हो. तुम मुझे सुख दो. हे पाप्मा! पीड़ारहित मुझ को पुण्य के फल के रूप में प्राप्त होने वाले लोक में स्थापित करो. (१)
O proud God of sin! Leave me. You are going to subdue everyone. You give me pleasure. O Papama! Establish me without pain in the world that is received as the fruit of virtue. (1)