हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.28.1

कांड 6 → सूक्त 28 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
ऋ॒चा क॒पोतं॑ नुदत प्र॒णोद॒मिषं॒ मद॑न्तः॒ परि॒ गां न॑यामः । सं॑लो॒भय॑न्तो दुरि॒ता प॒दानि॑ हि॒त्वा न॒ ऊर्जं॒ प्र प॑दा॒त्पथि॑ष्ठः ॥ (१)
हे देवो! इस मंत्र के द्वारा कबूतर को हमारे घर से दूर जाने के लिए प्रेरित करो. हम अन्न को पा कर तृप्त होते हुए धरती पर गायों को सभी ओर चराएं. हम कबूतर के पंजों के चिल्लों को भली प्रकार धोएं और वह कबूतर हमारी पाकशाला के अन्न को त्याग कर पक्षियों में श्रेष्ठ हो तथा उड़ जाए. (१)
O God! By this mantra, motivate the pigeon to go away from our house. We should feed the cows all over the earth while getting food and getting it. We should wash the nooks of the pigeon's claws well and that pigeon should leave the food of our kitchen and become superior among the birds and fly. (1)