हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.32.1

कांड 6 → सूक्त 32 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 32
अ॑न्तर्दा॒वे जु॑हु॒ता स्वे॒तद्या॑तुधान॒क्षय॑णं घृ॒तेन॑ । आ॒राद्रक्षां॑सि॒ प्रति॑ दह॒ त्वम॑ग्ने॒ न नो॑ गृ॒हाणा॒मुप॑ तीतपासि ॥ (१)
हे ऋत्विजो! राक्षसों का विनाश करने वाले इस हवि को घी के साथ अग्नि में हवन करो. हे अग्नि! उपद्रव करने वाले इन राक्षसों को भस्म करो तथा हमारे घरों को संताप युक्त मत करो. (१)
O Ritvijo! Perform havan in the agni with ghee to this havi, which destroys demons. O agni! Consume these demons who create nuisance and do not make our homes angry. (1)