अथर्ववेद (कांड 6)
यो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑त्य॒ग्निस्ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॑ । स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑ ॥ (२)
जो अग्नि, अपने तीक्ष्ण तेज से राक्षसों का विनाश करते हैं, वह अग्नि हमें राक्षस, पिशाच आदि से बचाएं. (२)
The agni that destroys demons with its sharp ness, that agni saves us from demons, vampires, etc. (2)