अथर्ववेद (कांड 6)
यो अ॒स्य पा॒रे रज॑सः शु॒क्रो अ॒ग्निरजा॑यत । स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑ ॥ (५)
इस भूलोक के ऊपर जो अंतरिक्ष है, उस में जो निर्मल सूर्य रूपी अग्नि उत्पन्न हुई थी, वह हमें शत्रुओं से बचाए. (५)
The agni of the pure sun that was created in the space above this earth, save us from the enemies. (5)