हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 50
ह॒तं त॒र्दं स॑म॒ङ्कमा॒खुम॑श्विना छि॒न्तं शिरो॒ अपि॑ पृ॒ष्टीः शृ॑णीतम् । यवा॒न्नेददा॒नपि॑ नह्यतं॒ मुख॒मथाभ॑यं कृणुतं धा॒न्याय ॥ (१)
हे अश्विनीकुमारो! हिंसक एवं बिल में प्रवेश करने वाले चूहे का विनाश करो. उस का सिर काट डालो तथा उस की पीठ की हड्डी चूरचूर कर दो. चूहा हमारे जौ नहीं खा पाए, इसलिए उस का मुंह बंद कर दो. ऐसा कर के तुम धान्य के लिए अभय करो. (१)
O Ashwinikumaro! Destroy the violent and burrowing rat. Cut off his head and crush his back bone. The rat could not eat our barley, so close its mouth. By doing this, you should be afraid for grain. (1)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 50
तर्द॒ है पत॑ङ्ग॒ है जभ्य॒ हा उप॑क्वस । ब्र॒ह्मेवासं॑स्थितं ह॒विरन॑दन्त इ॒मान्यवा॒नहिं॑सन्तो अ॒पोदि॑त ॥ (२)
हे हिंसक चूहो तथा हे पतंगो! तुम उपद्रव करते हो, इसीलिए तुम्हारे विनाश के निमित्त दी गई हवि ब्रह्म के समान प्रभावशील हो. तुम हमारे जौ आदि अन्नों का विनाश न करते हुए इस स्थान से भाग जाओ. (२)
O violent rats and O moths! You create nuisance, that is why the havi given for your destruction is as effective as Brahman. You should run away from this place without destroying our barley etc. (2)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 50
तर्दा॑पते॒ वघा॑पते॒ तृष्ट॑जम्भा॒ आ शृ॑णोत मे । य आ॑र॒ण्या व्यद्व॒रा ये के च॒ स्थ व्यद्व॒रास्तान्त्सर्वा॑ञ्जम्भयामसि ॥ (३)
हे हिंसक चूहों एवं पतंगों आदि के स्वामी! तुम तीखे दांतों वाले हो. तुम मेरे इस वचन को सुनो. तुम चाहे जंगल में रहने वाले हो अथवा ग्राम में निवास करने वाले हो, हम अपने इस अनुष्ठान द्वारा तुम्हारा विनाश करते हैं. (३)
O swami of violent rats and moths etc. You are sharp-toothed. You listen to this word of mine. Whether you live in a forest or a village dweller, we destroy you through this ritual. (3)