अथर्ववेद (कांड 6)
अ॒हं ज॑जान पृथि॒वीमु॒त द्याम॒हमृ॒तूंर॑जनयं स॒प्त सिन्धू॑न् । अ॒हं स॒त्यमनृ॑तं॒ यद्वदा॑मि॒ यो अ॑ग्नीषो॒मावजु॑षे॒ सखा॑या ॥ (३)
मैं ने धरती और आकाश को उत्पन्न किया है. मैं ने ही छः ऋलुओं और गंगा आदि सात नदियों और सात सागरों का निर्माण किया है. मैं अग्नि और सोम को सागर के निर्माण में सहयोग के रूप में प्राप्त करता हूं. (३)
I have created the earth and the sky. I have created six rillus and seven rivers and seven oceans like Ganga. I receive Agni and Som as a collaboration in the creation of sagar. (3)