अथर्ववेद (कांड 6)
त्वं नो॒ नभ॑सस्पत॒ ऊर्जं॑ गृ॒हेषु॑ धारय । आ पु॒ष्टमे॒त्वा वसु॑ ॥ (२)
हे अंतरिक्ष के पालन कर्ता अग्नि! तुम हमारे घरों में रस वाले अन्न को स्थापित करो प्रजा, पशु एवं धन हमारे पास आएं. (२)
O agni that follows space! You install juice food in our homes, people, animals and money come to us. (2)