हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 99
अ॒भि त्वे॑न्द्र॒ वरि॑मतः पु॒रा त्वां॑हूर॒णाद्धु॑वे । ह्वया॑म्यु॒ग्रं चे॒त्तारं॑ पु॒रुणा॑मानमेक॒जम् ॥ (१)
हे इंद्र! विस्तीर्ण शरीर के कारण मैं तुझे संग्रामों में बुला रहा हू. मैं संग्राम में पराजय से बचने के लिए तुम्हारा आह्वान पहले ही करता हूं. हे इंद्र! तुम अत्यधिक शक्तिशाली, जय के उपाय जानने वाले, अनेक शत्रुओं को जीतने वाले एवं अकेले ही युद्ध जीतने वाले हो. (१)
O Indra! I am calling you in battles because of your wide body. I already call upon you to avoid defeat in the struggle. O Indra! You are very powerful, know the ways of victory, conquer many enemies and win the war alone. (1)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 99
यो अ॒द्य सेन्यो॑ व॒धो जिघां॑सन्न उ॒दीर॑ते । इन्द्र॑स्य॒ तत्र॑ बा॒हू स॑म॒न्तं परि॑ दद्मः ॥ (२)
इस समय शत्रुओं की सेनाओं के आयुध हमें मारने के लिए उठ रहे हैं. इस वध से हमारी रक्षा के लिए इंद्र की भुजाएं सर्वत्र सहायता करें. हे राजन्‌! हे सविता! हे सोम! विनाश से बचने के लिए मुझे संग्राम में उत्तम विजय प्रदान करो. (२)
At this time the armaments of the enemies' armies are rising to kill us. To protect us from this slaughter, indra's arms should help everywhere. O king! O Savita! O Mon! Give me the best victory in the battle to avoid destruction. (2)

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 99
परि॑ दद्म॒ इन्द्र॑स्य बा॒हू स॑म॒न्तं त्रा॒तुस्त्राय॑तां नः । देव॑ सवितः॒ सोम॑ राजन्सु॒मन॑सं मा कृणु स्व॒स्तये॑ ॥ (३)
पालनकर्ता इंद्र की भुजाएं हम अपने चारों ओर धारण करते हैं, वे सब ओर से हमारी रक्षा करें. हे सबके प्रेरक और राजा सोम देव! मुझे संग्राम ने नष्ट न होने वाला और शोभन विजय वाला बनाओ. (३)
We hold the arms of the sustainer Indra around us, they should protect us from all sides. O inspiration and king of all, Som Dev! Make me not going to be destroyed by Sangram and Shobhan vijay wala. (3)