अथर्ववेद (कांड 7)
पूष॒न्तव॑ व्र॒ते व॒यं न रि॑ष्येम क॒दा च॒न । स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि ॥ (३)
हे पूषा! अर्थात् सूर्य देव! तुम्हारे यज्ञरूप कर्म में संलग्न हम कभी भी नष्ट न हों. इस कर्म में हम सदा तुम्हारे स्तुतिकर्ता बनें. (३)
O Pusha! That is, the Sun God! We should never be destroyed in your sacrificial deeds. In this deed, let us always praise you. (3)