हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.102.8

कांड 7 → सूक्त 102 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 102
मन॑सस्पत इ॒मं नो॑ दि॒वि दे॒वेषु॑ य॒ज्ञम् । स्वाहा॑ दि॒वि स्वाहा॑ पृथि॒व्यां स्वाहा॒न्तरि॑क्षे॒ स्वाहा॒ वाते॑ धां॒ स्वाहा॑ ॥ (८)
हे समस्त प्राणियों के स्वामी देव! हमारे इस यज्ञ को स्वर्ग में वर्तमान देवों तक पहुंचाओ. तुम हमारे यज्ञ को आकाश में, पृथ्वी पर, अंतरिक्ष में एवं सभी कर्मो के आधार वायु में स्थापित करो. (८)
O Swami God of all beings! Take this yajna of ours to the present gods in heaven. You establish our sacrifice in the sky, on earth, in space and in the base air of all deeds. (8)