अथर्ववेद (कांड 7)
यत्स्वप्ने॒ अन्न॑म॒श्नामि॒ न प्रा॒तर॑धिग॒म्यते॑ । सर्वं॒ तद॑स्तु मे शि॒वं न॒हि तद्दृ॒ष्यते॒ दिवा॑ ॥ (१)
स्वप्न देखते समय मैं जो अन्न खाता हूं, वह अन्न प्रातःकाल दिखाई नहीं देता. वह अन्न दिन में भी नहीं दिखाई देता. स्वप्न में खाया गया समस्त भोजन मेरे लिए कल्याण करने वाला हो. (१)
The food I eat while dreaming is not visible in the morning. That food is not visible even during the day. May all the food eaten in the dream be good for me. (1)