अथर्ववेद (कांड 7)
आ ते॑ ददे व॒क्षणा॑भ्य॒ आ ते॒ऽहं हृद॑याद्ददे । आ ते॒ मुख॑स्य॒ सङ्का॑शा॒त्सर्वं॑ ते॒ वर्च॒ आ द॑दे ॥ (१)
हे नारी! मैं तेरी योनि एवं जांघों के तेज का अपहरण करता हूं. हे नारी! मैं तेरे स्वस्थ मन से साधु पुरुष के ध्यान रूपी तेज का अपहरण करता हूं. मैं तेरे मुख से सब को प्रसन्न करने वाले तेज का अपहरण करता हूं. अधिक क्या कहूं, मैं तेरे सभी अंगों से सौभाग्य रूपी तेज का अपहरण करता हूं. (१)
O woman! I kidnap the sharpness of your vagina and thighs. O woman! I kidnap the meditative tej of the sadhu man with your healthy mind. I kidnap tej who pleases everyone with your mouth. What more, I kidnap the good fortune tej from all your organs. (1)