हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.13.1

कांड 7 → सूक्त 13 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 13
स॒भा च॑ मा॒ समि॑तिश्चावतां प्र॒जाप॑तेर्दुहि॒तरौ॑ संविदा॒ने । येना॑ सं॒गच्छा॒ उप॑ मा॒ स शि॑क्षा॒च्चारु॑ वदानि पितरः॒ संग॑तेषु ॥ (१)
विद्वानों का समाज एवं संग्राम करने वाले योद्धा जनों का समूह मेरी रक्षा करे. सारे संसार की सृष्टि करने वाले प्रजापति की वे दोनों पुत्रियां मेरी रक्षा करें. जो मेरी रक्षा के विषय में एकमत हैं, उन से मैं संगत होऊं तथा विद्वान्‌ मेरे समीप आ कर मुझे शिक्षा दें. हे सभासदजनो! जो मेरी कही बात का 'साधुसाधु' कह कर समर्थन करें, उन के साथ मिल कर मैं वादविवादों में न्याय युक्त उत्तर दूं. (१)
May the society of scholars and the group of warriors who fight protect me. May those two daughters of Prajapati, who created the whole world, protect me. I should be compatible with those who are unanimous about protecting me and scholars should come near me and teach me. O members! Along with those who support what I said by saying 'sadhusadhu', I should give a just reply in the debates. (1)