हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.24.1

कांड 7 → सूक्त 24 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
दौष्व॑प्न्यं॒ दौर्जी॑वित्यं॒ रक्षो॑ अ॒भ्व॑मरा॒य्यः॑ । दु॒र्णाम्नीः॒ सर्वा॑ दु॒र्वाच॒स्ता अ॒स्मन्ना॑शयामसि ॥ (१)
व्याधि दिखाने वाले बुरे सपने को, राक्षसों को, टोनेटोटके से उत्पन्न भीषण भय को, पिशाचियों को तथा दरिद्रता को हम इस होने वाले टोटके से ग्रस्त पुरुष से दूर करते हैं. (१)
We remove the nightmares that show disease, the demons, the fierce fear of tonetotes, vampires and poverty from this man suffering from this trick. (1)