हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.26.1

कांड 7 → सूक्त 26 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 26
ययो॒रोज॑सा स्कभि॒ता रजां॑सि॒ यौ वी॒र्यैर्वी॒रत॑मा॒ शवि॑ष्ठा । यौ पत्ये॑ते॒ अप्र॑तीतौ॒ सहो॑भि॒र्विष्णु॑मग॒न्वरु॑णं पू॒र्वहू॑तिः ॥ (१)
जिन विष्णु और वरुण के बल के द्वारा पृथ्वी आदि स्थान दृढ़ किए गए हैं, जो विष्णु और वरुण अपने वीरतापूर्ण कर्मों के द्वारा अतिशय शक्तिशाली ऐश्वर्य प्राप्त कर चुके हैं, उन विष्णु और वरुण को सभी देवों से पहले किया गया आह्वान प्राप्त हो. (१)
Vishnu and Varuna, through the power of Vishnu and Varuna, who have been strengthened in the earth and other places, who have attained very powerful opulence through their heroic deeds, may Vishnu and Varuna receive the call given before all the gods. (1)