हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 7.34.1

कांड 7 → सूक्त 34 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 34
सं मा॑ सिञ्चन्तु म॒रुतः॒ सं पू॑ष॒ सं बृह॒स्पतिः॑ । सं मा॒यम॒ग्निः सि॑ञ्चतु प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च दी॒र्घमायुः॑ कृणोतु मे ॥ (१)
मरुत्‌ आदि देवगण मुझ फल चाहने वाले यजमान को पुत्र आदि रूप प्रजा से और धन से युक्त करें. अग्नि मेरे विद्यार्थी की आयु लंबी करें. (१)
May the deserted gods equip me with the host who wants fruit with the people and wealth in the form of a son etc. Agni make my student's life long. (1)