हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
प्रान्यान्त्स॒पत्ना॒न्त्सह॑सा॒ सह॑स्व॒ प्रत्यजा॑ताञ्जातवेदो नुदस्व । इ॒दं रा॒ष्ट्रं पि॑पृहि॒ सौभ॑गाय॒ विश्व॑ एन॒मनु॑ मदन्तु दे॒वाः ॥ (१)
हे अग्नि! मेरे उत्पन्न शत्रुओं को बहुत दूर भगा दो. हे उत्पन्नों को जानने वाले अग्नि देव! मेरे ऐसे शत्रुओं का विनाश करो, जिन्हें मैं नहीं जानता. हमारे इस राष्ट्र को तुम सौभाग्य से पूर्ण करो. सभी देव शत्रु विनाश का प्रयोग करने वाले इस यजमान को प्रसन्न करें. (१)
O agni! Drive away my created enemies too far. O God of agni who knows the births! Destroy my enemies whom I do not know. May you complete this nation of ours fortunately. May all gods please this host who uses enemy destruction. (1)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
इ॒मा यास्ते॑ श॒तं हि॒राः स॒हस्रं॑ ध॒मनी॑रु॒त । तासां॑ ते॒ सर्वा॑साम॒हमश्म॑ना॒ बिल॒मप्य॑धाम् ॥ (२)
हे मुझ से विद्वेष करने वाली स्त्री! तेरी जो गर्भधारण संबंधी सौ से अधिक नाड़ियां हैं तथा हजार धमनियां हैं, मैं उन सब का मुख पत्थर से ढक कर तुझे बांझ बनाता हूं. (२)
O woman who hates me! I cover the faces of all your pregnant nerves and a thousand arteries with stone and make you infertile. (2)

अथर्ववेद (कांड 7)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
परं॒ योने॒रव॑रं ते कृणोमि॒ मा त्वा॑ प्र॒जाभि भू॒न्मोत सूनुः॑ । अ॒स्वं त्वाप्र॑जसं कृणो॒म्यश्मा॑नं ते अपि॒धानं॑ कृणोमि ॥ (३)
हे मेरे प्रतिकूल रहने वाली नारी! मैं तेरी योनि के भीतर वाले स्थान अर्थात्‌ गर्भाशय को गर्भ धारण के अयोग्य बनाता हूं. इसीलिए तुझे कन्या रूपी संतान भी प्राप्त न हो. तुझे पुत्र संतान भी न मिले. मैं तुझे खच्चरी के समान संतान रहित बनाता हूं. मैं तेरे गर्भाशय को पत्थर से ढकता हूं. (३)
O woman who is against me! I make the place inside your vagina, that is, the uterus, unfit for conception. That is why you do not even get a girl child. You don't even get a son and a child. I make you childless like a mule. I cover your uterus with a stone. (3)